ये संदिल कहाँ रोक पाए हैं,दरिया के पानी को
मजबूत हौसलों को जमीं तक आना पड़ता है,
गीदड़ की क्या औकात है नजरे मिलाने की
शेरों से तो शेर ही को लड़ाना पड़ता है।
ये संदिल कहाँ रोक पाए हैं,दरिया के पानी को
मजबूत हौसलों को जमीं तक आना पड़ता है,
गीदड़ की क्या औकात है नजरे मिलाने की
शेरों से तो शेर ही को लड़ाना पड़ता है।
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